Vande Mataram Controversy: Mahendra Bhatt addresses Vande Mataram Controversy and targets Congress in Dehradun
Vande Mataram Controversy: उत्तराखंड में Vande Mataram Controversy को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार, 24 अगस्त को देहरादून में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर राष्ट्रगीत को लेकर विभाजनकारी राजनीति और वोट बैंक साधने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय चेतना और भारत माता के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
हालांकि प्रेस वार्ता के दौरान महेंद्र भट्ट ने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोगों को वंदे मातरम् की दो पंक्तियों से ज्यादा याद नहीं हैं। उन्होंने इसके लिए लंबे समय तक पूर्ण स्वरूप में राष्ट्रगीत का नियमित गायन नहीं होने को जिम्मेदार बताया। भट्ट के मुताबिक लगातार अभ्यास और सामूहिक गायन से नई पीढ़ी को इसके पूरे स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी जा सकती है।
कांग्रेस पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से 1937 के प्रस्ताव को दोबारा स्वीकार किए जाने और वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे कांग्रेस की विभाजनकारी और तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा इस फैसले का विरोध करती है।
उन्होंने कहा कि Vande Mataram Controversy को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है और इसने आजादी के संघर्ष के दौरान लोगों में राष्ट्रीय भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भट्ट ने कहा कि वंदे मातरम् देश की राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा है और इसके सम्मान को लेकर भाजपा किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।
वंदे मातरम् के इतिहास पर जनजागरण अभियान चलाएगी बीजेपी
महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा अब वंदे मातरम् के इतिहास, अर्थ और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका को लेकर जनजागरण अभियान चलाएगी। पार्टी कार्यकर्ता आम लोगों और खासतौर पर युवाओं के बीच जाकर राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देंगे।
उनके मुताबिक नई पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् किस तरह राष्ट्रीय आंदोलन की भावना से जुड़ा था। भाजपा इस विषय को लोगों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।
भट्ट ने कहा कि राष्ट्रगीत किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। यह देश की राष्ट्रीय विरासत का हिस्सा है और इसके सम्मान की जिम्मेदारी हर नागरिक की है।
1937 के प्रस्ताव और 1923 के काकीनाडा अधिवेशन का किया जिक्र
प्रेस वार्ता में महेंद्र भट्ट ने वंदे मातरम् के इतिहास से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने 1923 के काकीनाडा अधिवेशन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी वंदे मातरम् के गायन को लेकर विरोध की स्थिति सामने आई थी।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि आज भी पार्टी का नेतृत्व उसी तरह की राजनीति को आगे बढ़ाता हुआ दिखाई देता है। भट्ट ने महात्मा गांधी के वंदे मातरम् को लेकर विचारों का भी उल्लेख किया और कहा कि गांधी ने इसे राष्ट्रीय भावना से जोड़कर देखा था।
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस महात्मा गांधी के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करती है, लेकिन उनके विचारों को नजरअंदाज करती है।
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हरीश रावत के बयान पर भी किया पलटवार
Vande Mataram Controversy के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बयान पर भी महेंद्र भट्ट ने प्रतिक्रिया दी। हरीश रावत ने वंदे मातरम् के मुद्दे को जेन-जी से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया था।
इस पर भट्ट ने कहा कि हरीश रावत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें अपने कार्यकर्ताओं को राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के दौर से जुड़े गीतों और उनके ऐतिहासिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी राजनीतिक दलों और समाज की जिम्मेदारी है।
भट्ट ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया जाना चाहिए।
खुद माना-लोगों को दो छंद से ज्यादा याद नहीं
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से सवाल किया कि क्या उन्हें स्वयं वंदे मातरम् का पूरा गीत याद है और क्या पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को इसके सभी छंद कंठस्थ हैं।
इस सवाल पर महेंद्र भट्ट ने स्वीकार किया कि फिलहाल बहुत से लोगों को इसके सीमित हिस्से ही याद हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक नियमित रूप से पूर्ण स्वरूप में इसका गायन नहीं होने के कारण लोगों में इसकी जानकारी कम हुई है।
भट्ट ने दावा किया कि यदि स्कूलों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और अन्य अवसरों पर नियमित रूप से वंदे मातरम् का अभ्यास और गायन किया जाए तो धीरे-धीरे इसके पूरे स्वरूप की जानकारी लोगों तक पहुंचेगी।
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‘पूरा नहीं गा सकते तो सम्मान में खड़े हों’
महेंद्र भट्ट ने कहा कि वंदे मातरम् के सम्मान का अर्थ केवल उसका पूरा गायन करना नहीं है। अगर कोई व्यक्ति पूरा राष्ट्रगीत नहीं गा सकता तो कम से कम उसके सम्मान में खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान की भावना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना नागरिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
यह बयान इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि बीजेपी कांग्रेस पर वंदे मातरम् के सीमित गायन को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि उसके प्रदेश अध्यक्ष ने खुद स्वीकार किया कि वर्तमान में आम लोगों को इसके सीमित छंद ही याद हैं।
वोट बैंक की राजनीति का लगाया आरोप
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी राष्ट्रगीत के मुद्दे पर भी वोट बैंक की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए वंदे मातरम् का सम्मान राजनीतिक लाभ का विषय नहीं है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में वंदे मातरम् को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है। पार्टी अब इसके इतिहास और महत्व को देशभर में पहुंचाने के लिए अभियान चलाएगी।
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आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है सियासत
उत्तराखंड में Vande Mataram Controversy ने एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव को सामने ला दिया है। बीजेपी जहां इसे राष्ट्रगीत के सम्मान और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बनाए जाने पर सवाल उठा रही है।
फिलहाल दोनों दलों के नेता अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच अपनी बात रख रहे हैं। भाजपा का अभियान आगे बढ़ने के साथ इस मुद्दे पर प्रदेश की सियासत और तेज होने की संभावना है। वहीं कांग्रेस भी भाजपा के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे अहम बात यही है कि वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व और उसके सम्मान को लेकर राजनीतिक बहस से आगे समाज में तथ्यात्मक और संतुलित चर्चा हो।
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