Zee Shares fall sharply ahead of NCLAT hearing in Subhash Chandra ₹22,000 crore debt case
Zee Shares: सोमवार को शेयर बाजार खुलते ही Zee Shares में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। जी एंटरटेनमेंट के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 14.3 फीसदी तक टूट गए। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। बीएसई पर Zee Shares करीब 100.85 रुपये के भाव पर खुले थे। पिछले कारोबारी सत्र में शेयर 101.55 रुपये पर बंद हुए थे। बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद शेयर 87 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गए। हालांकि निचले स्तरों से शेयर में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली। दोपहर करीब 12:53 बजे Zee Shares लगभग 8 फीसदी की गिरावट के साथ 93.70 रुपये के आसपास कारोबार कर रहे थे। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र था, जब शेयर दबाव में रहे।
Zee Shares की गिरावट के पीछे क्या है वजह?
Zee Shares में इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी से जुड़े एक अहम कर्ज विवाद को माना जा रहा है। तीन बड़े वित्तीय संस्थानों ने NCLT के हालिया आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है। केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने NCLT के फैसले के खिलाफ अपील का रुख अपनाया है। इन संस्थानों की आपत्ति सुभाष चंद्रा की ओर से पेश किए गए रिपेमेंट प्लान को लेकर है। बाजार में इस खबर के सामने आने के बाद Zee Shares पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। निवेशकों को आशंका है कि इस विवाद का असर कंपनी और उससे जुड़े वित्तीय मामलों पर पड़ सकता है।
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22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.25 करोड़ का भुगतान?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के दावों की है। NCLT ने 25 अगस्त को वित्तीय लेनदारों की आपत्तियों को खारिज करते हुए रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी। मंजूर योजना के अनुसार, करीब 22 हजार करोड़ रुपये के दावों के बदले लेनदारों को सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान प्रस्तावित है। इसके अलावा इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया की लागत के लिए 25 लाख रुपये अलग रखे गए हैं। इतने बड़े दावे के मुकाबले भुगतान की रकम बेहद कम होने के कारण कर्जदाताओं में नाराजगी है। इसी वजह से Zee Shares में भी निवेशकों की चिंता दिखाई दी है।
कल NCLAT में होगी अहम सुनवाई
अब इस मामले की अगली बड़ी कड़ी NCLAT की सुनवाई है। तीन वित्तीय संस्थानों की चुनौती के बाद मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने पहुंच गया है। NCLAT में होने वाली सुनवाई पर बाजार की नजर रहेगी। अदालत में रिपेमेंट प्लान और NCLT के आदेश को लेकर पक्षों की दलीलें सामने आ सकती हैं। इसका असर आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Zee Shares पहले से ही दबाव में कारोबार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में मामले से जुड़ी खबरें शेयर की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।
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सुभाष चंद्रा का क्या है कनेक्शन?
यह विवाद एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े रिपेमेंट प्लान को लेकर है। इस योजना में वित्तीय लेनदारों के दावों के निपटारे का प्रस्ताव रखा गया था। NCLT ने 25 अगस्त को इस योजना को मंजूरी दे दी थी। हालांकि कई वित्तीय लेनदार इस फैसले से सहमत नहीं हैं। इसी कारण अब अपीलीय न्यायाधिकरण में मामला पहुंचा है। पूरे विवाद का सीधा असर Zee Shares पर निवेशकों की धारणा में दिखाई दे रहा है। बाजार किसी भी नए कानूनी अपडेट को कंपनी के लिए महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देख रहा है।
Zee Shares का पिछला प्रदर्शन कैसा रहा?
अगर इस साल के प्रदर्शन की बात करें तो Zee Shares अब तक करीब 1 फीसदी ऊपर बताए जा रहे हैं। इसी अवधि में सेंसेक्स में करीब 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि एक साल की अवधि में तस्वीर अलग है। पिछले एक साल में Zee Shares करीब 21 फीसदी तक टूट चुके हैं। इससे पता चलता है कि शेयर लंबे समय से उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। शेयर ने इस साल 23 मार्च को 68.10 रुपये का 52-वीक लो बनाया था। वहीं पिछले साल 22 सितंबर को शेयर 121.75 रुपये के 52-वीक हाई तक पहुंचा था।
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निवेशकों की नजर अब NCLAT पर
सोमवार की तेज गिरावट के बाद Zee Shares के निवेशकों के लिए मंगलवार का दिन काफी अहम माना जा रहा है। NCLAT में होने वाली सुनवाई से मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। हालांकि सिर्फ एक सुनवाई के आधार पर शेयर की भविष्य की चाल तय नहीं की जा सकती। कानूनी प्रक्रिया में आने वाले फैसले और कंपनी से जुड़े दूसरे वित्तीय घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल Zee Shares पर बाजार की नजर बनी हुई है। 14 फीसदी तक की शुरुआती गिरावट के बाद निवेशक यह देख रहे हैं कि NCLAT में क्या होता है और कर्ज विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि NCLAT NCLT के आदेश को बरकरार रखता है या मामले में कोई अलग निर्देश देता है। इसके अलावा कर्जदाताओं की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। अगर कानूनी विवाद लंबा खिंचता है, तो Zee Shares में उतार-चढ़ाव आगे भी देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, मामले में स्पष्टता आने पर निवेशकों की चिंता कुछ कम हो सकती है। फिलहाल बाजार किसी भी बड़े अपडेट का इंतजार कर रहा है। मंगलवार की NCLAT सुनवाई और उसके बाद आने वाले घटनाक्रम यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि Zee Shares आगे किस दिशा में बढ़ते हैं।
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