Angel Chakma Murder Case Dehradun Tripura Student CM Pushkar Singh Dhami
Angel Chakma Murder Case: उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र एंजेल चकमा की हत्या ने देशभर में छात्र सुरक्षा और नस्ली भेदभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। देहरादून छात्र हत्याकांड में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। अब एंजेल चकमा केस अपडेट 2026 में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। फरवरी में 659 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद जुलाई 2026 में फरार आरोपी के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की खबर आई।
9 दिसंबर का विवाद, 26 दिसंबर को मौत
Angel Chakma Murder Case की शुरुआत 9 दिसंबर 2025 को देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में हुई। त्रिपुरा निवासी एंजेल अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ बाजार गए थे। शिकायत के अनुसार, वहां युवकों के एक समूह ने कथित तौर पर नस्ली टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर विवाद हिंसक हो गया। सेलाकुई हत्याकांड में एंजेल को चाकू से गंभीर चोटें आईं। करीब 17 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा ने 26 दिसंबर को अस्पताल में दम तोड़ दिया।
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सीएम धामी ने पिता को फोन कर दिया था भरोसा
Angel Chakma Murder Case के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 29 दिसंबर 2025 को एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा से फोन पर बातचीत की। CM Pushkar Singh Dhami ने घटना पर दुख जताते हुए परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उत्तराखंड सरकार की कार्रवाई के तहत उस समय पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और फरार मुख्य आरोपी की तलाश की जानकारी दी गई थी।
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अमित शाह से लेकर माणिक साहा तक बातचीत
Angel Chakma Murder Case की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से भी बातचीत की। त्रिपुरा छात्र हत्या मामला दोनों राज्यों के बीच सुरक्षा और न्याय का महत्वपूर्ण विषय बन गया। देहरादून में बाहरी छात्रों की सुरक्षा को लेकर धामी सरकार ने भरोसा दिलाया कि देश-विदेश से पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है।
इस संवेदनशील मामले को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय स्तर पर भी संवाद किया है। उन्होंने Amit Shah, Rajnath Singh और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री Manik Saha से बात कर स्थिति की जानकारी साझा की। धामी ने कहा कि देश-विदेश से उत्तराखंड आकर पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

25 हजार से एक लाख तक इनाम, रेड कॉर्नर नोटिस
Angel Chakma Murder Case में शुरुआत में उत्तराखंड पुलिस ने फरार आरोपी की जानकारी देने पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। टिपरा मोथा के नेता प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने निजी तौर पर 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। बाद में यज्ञराज अवस्थी गिरफ्तारी मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एंजेल चकमा मुख्य आरोपी पर एक लाख रुपये का इनाम था और नेपाल में छिपे होने की आशंका के बीच इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस प्राप्त किया गया।
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659 पन्नों की चार्जशीट में क्या सामने आया?
Angel Chakma Murder Case में देहरादून पुलिस ने 8 फरवरी 2026 को छह आरोपियों के खिलाफ 659 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इनमें दो नाबालिग भी शामिल बताए गए। एंजेल चकमा चार्जशीट में पीड़ित परिवार के बयान और घटना से संबंधित साक्ष्य शामिल किए गए। हालांकि नस्ली हमले के आरोप को लेकर विवाद बना रहा। परिजनों ने नस्ली टिप्पणियों का आरोप लगाया, जबकि तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि जांच में नस्ली हिंसा के प्रमाण नहीं मिले। अंतिम तथ्य न्यायिक परीक्षण से तय होंगे।
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राहुल गांधी ने उठाए नफरत और भेदभाव पर सवाल
Angel Chakma Murder Case पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घटना को घृणा अपराध बताते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की। राहुल गांधी एंजेल चकमा बयान ने देश में विविधता, सम्मान और भेदभाव पर नई बहस छेड़ी। लेकिन पूर्वोत्तर छात्रों की सुरक्षा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों, पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि विद्यार्थी बिना भय और भेदभाव के पढ़ सकें।
आखिर कब मिलेगा एंजेल चकमा को न्याय?
Angel Chakma Murder Case अब केवल एक हत्या की जांच नहीं, बल्कि न्यायिक जवाबदेही की परीक्षा भी है। जुलाई 2026 तक की उपलब्ध पुष्ट रिपोर्टों में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं मिली। एंजेल चकमा न्याय की मांग का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि आरोपी को भारत लाकर अदालत के सामने कब पेश किया जाएगा। देहरादून छात्र सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी यह मामला चेतावनी है कि किसी की पहचान, भाषा या क्षेत्र उसके सम्मान और सुरक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए।
–समाप्त—
