DIG probe into Meerut farmer leaders beating case and alleged forced dance at SSP office
DIG Probe: मेरठ के एसएसपी कार्यालय में किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट और बाद में एसओजी कार्यालय में जबरन डांस कराने के आरोपों ने पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है। मामले की DIG Probe अब पूरी हो चुकी है। सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह ने मेरठ पहुंचकर पीड़ित किसान नेताओं, पुलिस अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए तथा घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। जांच पूरी होने के बाद अब तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय समेत नौ पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
किसान नेताओं के आरोपों से शुरू हुआ विवाद
यह मामला किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़ा है। आरोप है कि दोनों को एसएसपी कार्यालय में हिरासत में लेने के बाद उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद उन्हें एसओजी कार्यालय ले जाया गया, जहां कथित तौर पर जबरन डांस कराया गया।
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मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। विवाद बढ़ने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान और भाजपा के एक नेता ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद एडीजी जोन भानु भास्कर ने सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह को DIG Probe की जिम्मेदारी सौंपी।
नौ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी
मामले में अब जिन पुलिसकर्मियों को नोटिस दिए जाने की तैयारी है, उनमें तत्कालीन मेरठ एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस के तत्कालीन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इनके अलावा उन पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन पर किसान नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार में शामिल होने के आरोप लगे हैं।
इससे पहले मेरठ के नवागत एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने मामले में शुरुआती कार्रवाई करते हुए सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार गौड़, दरोगा मुलायम सिंह, कांस्टेबल हरिओम, मुकेश कुमार, श्याम बाबू, सुमित कुमार, महिला कांस्टेबल नीलम लौर और सरकारी वाहन चालक ललित कुमार को लाइन हाजिर किया था। बाद में इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को निलंबित भी किया गया।
रात तक मेरठ में जांच करते रहे डीआईजी
DIG Probe को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी अभिषेक सिंह खुद मेरठ पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले एसएसपी कार्यालय का दौरा किया और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों से घटनाक्रम को लेकर जानकारी हासिल की।
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इसके बाद डीआईजी सर्किट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। जांच के दौरान दिग्विजय भाटी के शरीर पर आई चोटों का भी निरीक्षण किया गया और उन्हें रिकॉर्ड किया गया, ताकि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों को शामिल किया जा सके।
डीआईजी इसके बाद पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय भी पहुंचे। वहां उन्होंने घटनाक्रम से जुड़े पुलिसकर्मियों से पूछताछ की और उनके पक्ष को भी जाना। देर रात तक चली इस पड़ताल के बाद जांच रिपोर्ट तैयार की गई।
पुलिस ने आरोपों को बताया था निराधार
जहां किसान नेताओं ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं मेरठ पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया था। पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जारी जानकारी में कहा गया था कि दिग्विजय भाटी एसएसपी कार्यालय से अपने घर लौट रहे थे और रास्ते में उनकी स्कूटी फिसल गई थी।
पुलिस के मुताबिक, स्कूटी दुर्घटना में घायल होने के बाद दिग्विजय भाटी ने सिविल लाइंस थाने में लिखित शिकायत दी थी। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि शिकायत को जनरल डायरी में दर्ज किया गया था। इस तरह मामले में पुलिस का पक्ष किसान नेताओं के आरोपों से अलग रहा। इसी विरोधाभास के कारण निष्पक्ष जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
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दोनों किसान नेताओं के आपराधिक रिकॉर्ड का भी जिक्र
मेरठ पुलिस ने अपने पक्ष में दोनों किसान नेताओं के कथित आपराधिक रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया था। पुलिस के अनुसार, दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव अपने-अपने थाना क्षेत्रों के घोषित हिस्ट्रीशीटर हैं।
पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया गया कि दिग्विजय भाटी के खिलाफ अलग-अलग थानों में 10 प्राथमिकी दर्ज हैं, जबकि मोहित जाटव के खिलाफ सात प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई। जांच के दौरान आरोपी पुलिसकर्मियों ने भी डीआईजी के सामने इन रिकॉर्ड का उल्लेख किया।
हालांकि, इन आपराधिक मामलों का उल्लेख अपने आप में किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट के आरोपों को सही या गलत साबित नहीं करता। इसी वजह से जांच में घटनास्थल, बयान, उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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जांच रिपोर्ट के बाद आगे क्या होगा?
अब DIG Probe पूरी होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को नोटिस देकर उनका पक्ष मांगा जा सकता है। नोटिस के जवाब और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि किसान नेताओं के साथ एसएसपी कार्यालय और एसओजी कार्यालय में वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस का दावा और किसान नेताओं के आरोप एक-दूसरे से अलग हैं। ऐसे में जांच के निष्कर्ष यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि किन पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई और उनके खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल नौ पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किए जाने की तैयारी ने इस मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। DIG Probe के बाद अब सभी की नजर पुलिस विभाग की अगली कार्रवाई पर है।
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