PM Modi addresses BRICS Summit on Global South and UNSC reforms
Global South: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आज Global South दुनिया के सामने मौजूद कई बड़े संकटों की पहली कतार में खड़ा है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अब भी सीमित है। ऐसे में Global South को केवल बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम तय करने वाला बनना होगा।
प्रधानमंत्री ने BRICS को वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाने वाला समूह बताते हुए कहा कि यह संगठन किसी के खिलाफ नहीं है। उनके इस बयान को मौजूदा वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को साझेदारी के मंच में बदलना होगा
BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था की मौजूदा संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज दुनिया में एक तरह का ‘विशेषाधिकार का पिरामिड’ दिखाई देता है। इसमें सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति कुछ देशों के पास केंद्रित है, जबकि उन फैसलों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की भूमिका सीमित रहती है।
पीएम मोदी ने कहा कि इस व्यवस्था को बदलकर ऐसा मंच तैयार करने की जरूरत है, जहां हर देश की आवाज सुनी जाए और प्रत्येक सदस्य की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रयासों के केंद्र में मानवता का विकास होना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह संदेश Global South की बढ़ती भूमिका के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। उनका जोर ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर रहा जिसमें विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभाव मिले।
वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव का सुझाव
पीएम मोदी ने BRICS देशों के सामने वैश्विक शासन में सुधार के लिए एक ठोस पहल का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि सदस्य देश मिलकर वैश्विक शासन सुधार से जुड़े 10 प्रस्ताव तैयार करें।
उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को अगले BRICS शिखर सम्मेलन तक एक ‘BRICS सुधार रोडमैप’ का रूप दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य वैश्विक संस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाना होगा।
Global South के देशों के लिए यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में सुधार की मांग उठती रही है।
UNSC में तत्काल सुधार की मांग
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार को लेकर भी स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि UNSC सुधार के लिए अब और इंतजार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना पिरामिड से करते हुए कहा कि वर्तमान ढांचे में शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता ऊपर केंद्रित है, जबकि नीचे वे देश हैं जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने की क्षमता बहुत कम है।
पीएम मोदी के मुताबिक, वैश्विक संस्थाओं में व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। Global South की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए उसकी आवाज को अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक जगह मिलनी चाहिए।
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BRICS को बताया किसी के खिलाफ नहीं
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने BRICS की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ बनाया गया मंच नहीं है। इसका उद्देश्य सहयोग के जरिए साझा चुनौतियों का समाधान तलाशना और सदस्य देशों के हितों को आगे बढ़ाना है।
BRICS के मंच से Global South की बात उठाते हुए प्रधानमंत्री ने विकास, साझेदारी और समान भागीदारी पर जोर दिया। यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है।
नाविकों की सुरक्षा के लिए नेटवर्क का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS देशों के बीच नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और उनके हितों को लेकर सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। यह प्रस्ताव BRICS के सहयोग को केवल आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक क्षेत्रों तक विस्तार देने की दिशा में देखा जा रहा है।
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BRICS मंच पर कई देशों के नेता मौजूद
शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे।
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, मिस्र और वियतनाम के शीर्ष प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। ऐसे में BRICS का यह मंच Global South के देशों के बीच सहयोग और वैश्विक शासन व्यवस्था में बदलाव की मांग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
पीएम मोदी के बयान का मूल संदेश यही रहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में Global South को केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने वाली भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे वैश्विक नियमों और नीतियों को तय करने की प्रक्रिया में भी प्रभावी भागीदारी हासिल करनी होगी।
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1 ने “Global South को अब नियम मानने वाला नहीं, नियम तय करने वाला बनना होगा, PM मोदी का BRICS में बड़ा संदेश” पर विचार किया;