Balaghat Child Deaths: बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों में बच्चों की मौत के बाद परिवारों से मुलाकात करते अभिजीत दीपके
Balaghat Child Deaths: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बच्चों की मौतों को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठे हैं। Balaghat Child Deaths मामले के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक Abhijit Dipke शनिवार, 12 सितंबर 2026 को प्रभावित आदिवासी इलाकों में पहुंचे। उन्होंने उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने हाल के हफ्तों में अपने बच्चों को खोया है और प्रशासन से जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
Highlights
- बालाघाट के अडोरी, कोरका और बोंदारी गांवों में पहुंचे अभिजीत दीपके।
- बच्चों की मौतों के मामले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग।
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से मांगा जवाब।
- याचिका में इलाज, दूषित पानी और पोषण व्यवस्था पर गंभीर सवाल।
- केंद्र की जांच में मौतों के पीछे किसी एक बीमारी की पुष्टि नहीं, कई चिकित्सकीय कारण सामने आए।
अडोरी, कोरका और बोंदारी गांव पहुंचे
Balaghat Child Deaths मामले की जमीनी स्थिति समझने के लिए Abhijit Dipke स्थानीय युवाओं के साथ अडोरी, कोरका और बोंदारी गांव गए। उन्होंने वहां स्वास्थ्य सुविधाओं, इलाज की उपलब्धता और बच्चों की मौतों से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी ली। उनके दौरे का मकसद प्रभावित परिवारों से सीधे बातचीत करना और गांवों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को समझना था।
पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की मांग
Balaghat Child Deaths को लेकर Abhijit Dipke ने पत्रकारों से कहा कि बच्चों को खोने वाले परिवारों के साथ उनकी पूरी संवेदना है और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि मौतों के मामले सामने आने के बाद जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई है। दीपके ने कहा कि उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य जिम्मेदारी और जवाबदेही के सवाल को सामने लाना है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
Balaghat Child Deaths मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। Abhijit Dipke का दौरा अदालत की इस कार्रवाई के कुछ दिन बाद हुआ। न्यायालय में दायर जनहित याचिका में प्रभावित क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था, पीने के पानी और पोषण से जुड़ी कई गंभीर चिंताएं उठाई गई हैं।
किन विभागों को जारी हुआ नोटिस?
Balaghat Child Deaths से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट कलेक्टर और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। Abhijit Dipke ने भी प्रभावित गांवों के अपने दौरे के दौरान प्रशासनिक जवाबदेही के इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
50 बिस्तरों के अस्पताल में 400 बच्चों के इलाज का दावा
Balaghat Child Deaths मामले की जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रभावित बच्चों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा था। याचिका में दावा किया गया कि करीब 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में लगभग 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा था। Abhijit Dipke ने गांवों में पहुंचकर स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली और प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
पीले पानी को लेकर भी शिकायत
Balaghat Child Deaths मामले में पानी की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ प्रभावित क्षेत्रों के हैंडपंपों से पीले रंग का पानी निकल रहा था। इसके साथ ही बच्चों और महिलाओं को कई महीनों तक पौष्टिक भोजन समय पर नहीं मिलने की बात भी याचिका में कही गई। Abhijit Dipke की यात्रा के बाद इन बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा फिर तेज हुई है।
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किसी एक बीमारी को कारण मानना अभी सही नहीं
हालांकि Balaghat Child Deaths को किसी एक बीमारी या संक्रमण से जोड़ना अभी सही नहीं होगा। केंद्र की जांच में अलग-अलग मामलों में खसरा, मलेरिया, सह-संक्रमण, सांस लेने में परेशानी, शरीर में पानी की कमी, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसे कई चिकित्सकीय कारण सामने आए हैं। Abhijit Dipke की जवाबदेही की मांग के बीच यह महत्वपूर्ण है कि अधिकारियों ने किसी एक रोगजनक को सभी मौतों का कारण नहीं माना है।
हजारों लोगों की हुई जांच
Balaghat Child Deaths की जांच के दौरान सरकारी स्तर पर बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य निगरानी भी की गई है। केंद्र से जुड़ी जांच के अनुसार 32 हजार से अधिक लोगों की जांच की गई, जबकि प्रभावित बच्चों के उपचार, टीकाकरण और पानी के स्रोतों के शुद्धिकरण जैसे कदम भी उठाए गए। Abhijit Dipke की यात्रा ऐसे समय हुई जब इलाज के साथ दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा जारी है।
आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
Balaghat Child Deaths ने दूरदराज के आदिवासी इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती को फिर सामने ला दिया है। ऐसे क्षेत्रों में समय पर जांच, डॉक्टर, दवाएं, साफ पानी और पर्याप्त पोषण की उपलब्धता बेहद जरूरी है। Abhijit Dipke ने प्रभावित गांवों में परिवारों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की कि बच्चों की बीमारी और मौतों के दौरान उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ा।
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कोर्ट का नोटिस दोष तय होना नहीं
Balaghat Child Deaths पर अदालत में राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला जवाब आगे महत्वपूर्ण होगा। नोटिस जारी होने का अर्थ किसी अधिकारी या विभाग का दोष साबित होना नहीं है, बल्कि संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। Abhijit Dipke ने प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है, जबकि अंतिम निष्कर्ष जांच, सरकारी रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेंगे।
इलाज, पानी और पोषण सबसे बड़ी प्राथमिकता
Balaghat Child Deaths मामले में सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित परिवारों की सहायता, बीमार बच्चों का समय पर इलाज तथा साफ पानी और पोषण की व्यवस्था होना है। Abhijit Dipke के दौरे ने पीड़ित परिवारों की चिंताओं को फिर सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। अब संबंधित प्रशासन से अपेक्षा है कि वह उठाए गए आरोपों पर तथ्यात्मक जवाब दे और स्वास्थ्य सुविधाओं में सामने आने वाली कमियों को दूर करे।
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आगे सरकारी जवाब और जांच पर नजर
Balaghat Child Deaths केवल मौतों की संख्या का मामला नहीं, बल्कि दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, साफ पानी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल है। Abhijit Dipke ने अडोरी, कोरका और बोंदारी के दौरे में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अब उच्च न्यायालय में राज्य सरकार का जवाब और जांच से सामने आने वाले तथ्य यह स्पष्ट करने में अहम होंगे कि मौतों के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और व्यवस्था में कहां सुधार जरूरी है।

1 ने “Abhijit Dipke CJP: बालाघाट में बच्चों की मौतों पर जवाबदेही की मांग, आदिवासी गांवों पहुंचे अभिजीत दीपके मीडिया ने लिया आडे हाथ” पर विचार किया;