BRICS Summit 2026 में समुद्री सुरक्षा और नाविक इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क का प्रस्ताव रखते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी । PHOTO: PIB
नाविकों की सुरक्षा के लिए नई पहल
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने रखी। उन्होंने सदस्य और सहभागी देशों के बीच (SESN) Seafarers Emergency Support Network बनाने का प्रस्ताव दिया। प्रधानमंत्री का कहना था कि समुद्री कर्मियों का वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन किसी दुर्घटना, संघर्ष या दूसरे संकट के दौरान उन्हें समय पर मदद मिलना कई बार मुश्किल हो जाता है। प्रस्ताव का उद्देश्य इसी कमी को दूर करना है।
कैसे काम करेगा प्रस्तावित नेटवर्क
प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक BRICS Summit 2026 के तहत ऐसा तंत्र विकसित किया जा सकता है, जिसमें संबंधित देशों के समुद्री अधिकारी और राजनयिक मिशन सीधे संपर्क में रहें। (SESN) Seafarers Emergency Support Network के जरिए किसी जहाज या नाविक के संकट में फंसने पर जल्द सूचना साझा करने, चिकित्सा सहायता पहुंचाने, परिवार को जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी में सहयोग किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत होने की उम्मीद है।

सुरक्षित समुद्री मार्ग क्यों महत्वपूर्ण
BRICS Summit 2026 में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा ऐसे समय उठा है, जब दुनिया के कई महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत में भी समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता, समुद्री व्यापार की सुरक्षा और नाविकों के कल्याण पर जोर दिया। इसी पृष्ठभूमि में Seafarers Emergency Support Network जैसे तंत्र को संकट के समय देशों के बीच तेजी से सहयोग बढ़ाने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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ग्लोबल साउथ के लिए मोदी का संदेश
समुद्री सुरक्षा के साथ BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने विकासशील देशों की वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भूमिका बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि दुनिया के संकटों का सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ता है, लेकिन फैसले लेने वाली संस्थाओं में उनकी आवाज उसी अनुपात में मजबूत नहीं है। Seafarers Emergency Support Network जैसे व्यावहारिक प्रस्तावों के साथ भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि ग्लोबल साउथ केवल फैसले मानने वाला नहीं, बल्कि भविष्य के नियमों को आकार देने वाला पक्ष बने।
वैश्विक व्यवस्था के ‘पिरामिड’ पर सवाल
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Summit 2026 में मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था को असंतुलित बताते हुए कहा कि निर्णय लेने की ताकत कुछ देशों के पास केंद्रित नहीं रहनी चाहिए। समुद्री क्षेत्र में प्रस्तावित Seafarers Emergency Support Network की तरह ही उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में अधिक भागीदारी और समान प्रतिनिधित्व की जरूरत बताई। उनका कहना था कि जिन देशों पर वैश्विक फैसलों का असर पड़ता है, उन्हें उन फैसलों को आकार देने में भी पर्याप्त भूमिका मिलनी चाहिए।
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सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग
BRICS Summit 2026 के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की पुरानी मांग को फिर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि बदलती दुनिया में पुरानी वैश्विक व्यवस्थाओं को लंबे समय तक बिना बदलाव के नहीं चलाया जा सकता। Seafarers Emergency Support Network की तरह भारत का जोर ऐसी व्यवस्थाओं पर है जिनमें जिम्मेदारी और भागीदारी दोनों साझा हों। Reuters के अनुसार मोदी ने साफ कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता।
ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं: मोदी
प्रधानमंत्री ने BRICS Summit 2026 में इस बात पर भी जोर दिया कि यह मंच किसी देश या समूह के खिलाफ खड़ा किया गया गठबंधन नहीं है। भारत BRICS को उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में पेश कर रहा है। इसी सोच में Seafarers Emergency Support Network जैसे प्रस्ताव को भी व्यावहारिक सहयोग से जोड़ा गया है। AP के अनुसार मोदी ने अपने संबोधन में BRICS को पश्चिम-विरोधी गठबंधन के रूप में देखने की धारणा से अलग बताते हुए विकासशील देशों की भूमिका पर जोर दिया।
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कौन-कौन से प्रमुख नेता पहुंचे
नई दिल्ली के BRICS Summit 2026 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा जैसे बड़े नेता शामिल हुए। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी सम्मेलन का हिस्सा बने। ऐसे बड़े मंच पर Seafarers Emergency Support Network का प्रस्ताव समुद्री संकटों में बहुपक्षीय सहयोग की दिशा में भारत की पहल को सामने लाता है।
UAE से क्राउन प्रिंस शेख खालिद की भागीदारी
BRICS Summit 2026 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात की ओर से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान नई दिल्ली पहुंचे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पीएम मोदी और शेख खालिद के बीच 12 सितंबर को हुई बैठक की भी पुष्टि की। इस तरह Seafarers Emergency Support Network समेत समुद्री सुरक्षा के मुद्दे ऐसे मंच पर रखे गए जहां खाड़ी क्षेत्र से जुड़े देशों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
भारत की अध्यक्षता में क्या है बड़ा संदेश
कुल मिलाकर BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री मोदी का जोर केवल राजनीतिक घोषणाओं पर नहीं, बल्कि ऐसे सहयोगी ढांचे तैयार करने पर भी दिखाई दिया जिनका सीधा असर लोगों और व्यापार पर पड़ सके। Seafarers Emergency Support Network का विचार इसी दिशा में एक ठोस प्रस्ताव है। इसके साथ वैश्विक शासन में सुधार, विकासशील देशों की अधिक भागीदारी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग ने भारत के एजेंडे को स्पष्ट किया है-वैश्विक व्यवस्था में जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेने का अधिकार भी अधिक व्यापक होना चाहिए।
