Himachal Pradesh Monsoon damage with closed roads, landslides and heavy rainfall
Himachal Pradesh Monsoon: हिमाचल प्रदेश में मानसून का असर लगातार गंभीर बना हुआ है। भारी बारिश, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और सड़क हादसों ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित किया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 19 अगस्त सुबह 10 बजे तक की रिपोर्ट के मुताबिक, Himachal Pradesh Monsoon सीजन में अब तक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी घटनाओं में कुल 197 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 313 लोग घायल हुए हैं, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता बताया गया है।
मानसून की वजह से सरकारी और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान हुआ है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक कुल 1,00,171.78 लाख रुपये यानी करीब 1,001.72 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। इसके अलावा कई इलाकों में सड़क, बिजली और पेयजल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
279 सड़कें बंद, मंडी और चंबा सबसे ज्यादा प्रभावित
लगातार बारिश के बाद हिमाचल प्रदेश में कई प्रमुख और संपर्क मार्गों पर यातायात बाधित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 279 सड़कें बंद हैं। इनमें मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां कुल 100 सड़कें बंद हैं।
मंडी के सराज उपमंडल में 35, थलौट में 25, धर्मपुर में 23 और सुंदरनगर में 5 सड़कें बंद हैं। इसके बाद चंबा में 83 सड़कें प्रभावित हैं। चंबा उपमंडल में 22, भटियात में 21, तीसा में 18 और सलूणी में 12 सड़कें बंद बताई गई हैं।
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शिमला में 26, कुल्लू में 25 और सिरमौर में 16 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा हमीरपुर में 8, कांगड़ा में 6, सोलन में 5, ऊना और लाहौल-स्पीति में 4-4 तथा बिलासपुर में 2 सड़कें प्रभावित हैं। सड़कें बंद होने से कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
मानसून से जुड़ी आपदाओं में 81 लोगों की मौत
Himachal Pradesh Monsoon के दौरान विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से अब तक 81 लोगों की मौत हुई है। इनमें भूस्खलन से 14 लोगों की जान गई। इनमें 13 मौतें लाहौल-स्पीति और एक मौत चंबा में दर्ज हुई है। फ्लैश फ्लड की एक घटना में कांगड़ा में एक व्यक्ति की मौत हुई।
पेड़ और चट्टान गिरने की घटनाएं भी जानलेवा साबित हुई हैं। इनके कारण प्रदेश में 28 लोगों की मौत हुई है। शिमला में 8, कुल्लू में 7, चंबा और मंडी में 4-4, कांगड़ा में 2 तथा हमीरपुर, किन्नौर और सिरमौर में एक-एक मौत दर्ज की गई है।
सांप के काटने और करंट से भी गई जान
मानसून के दौरान सिर्फ बारिश और भूस्खलन ही नहीं, बल्कि अन्य घटनाओं ने भी लोगों की जान ली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सांप के काटने से 8 लोगों की मौत हुई है। इनमें कांगड़ा में 4, सिरमौर में 2 तथा शिमला और ऊना में एक-एक मौत शामिल है।
करंट लगने से भी 8 लोगों की जान गई। कांगड़ा में 3, ऊना में 2 तथा हमीरपुर, मंडी और शिमला में एक-एक मौत दर्ज की गई। डूबने से 5 लोगों की मौत हुई, जबकि कुल्लू में आग की घटना में एक व्यक्ति की जान गई। अन्य आपदा कारणों से 16 मौतें दर्ज की गई हैं।
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जिलावार आंकड़ों में लाहौल-स्पीति में 14, कांगड़ा में 13, शिमला में 12, चंबा में 10, कुल्लू में 9 और मंडी में 8 मौतें हुई हैं। सिरमौर में 7, ऊना में 3, हमीरपुर और किन्नौर में 2-2 तथा सोलन में एक मौत दर्ज की गई है।
सड़क हादसों में 116 लोगों की मौत
मानसून सीजन में कुल मौतों का एक बड़ा हिस्सा सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार खराब मौसम, सड़क की स्थिति और अन्य कारणों से हुए सड़क हादसों में 116 लोगों की मौत हुई है।
सड़क दुर्घटनाओं में मौत के मामले में सिरमौर सबसे ऊपर है, जहां 17 लोगों की जान गई। चंबा में 16, कुल्लू और शिमला में 14-14, कांगड़ा और ऊना में 12-12 तथा सोलन में 11 लोगों की मौत हुई।
इसके अलावा किन्नौर और लाहौल-स्पीति में 5-5, मंडी में 5, बिलासपुर में 4 और हमीरपुर में एक व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मौत हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि Himachal Pradesh Monsoon के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के साथ सड़क सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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सरकारी संपत्ति को सबसे ज्यादा नुकसान
लगातार बारिश और भूस्खलन से सार्वजनिक संपत्तियों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लोक निर्माण विभाग को सबसे अधिक 75,090.82 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इसके बाद जल शक्ति विभाग को 22,746.11 लाख रुपये की क्षति हुई।
बिजली बोर्ड को 530.61 लाख रुपये, स्वास्थ्य विभाग को 214.20 लाख रुपये, कृषि क्षेत्र को 72.04 लाख रुपये और बागवानी क्षेत्र को 6.92 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। सार्वजनिक और निजी संपत्ति को मिलाकर प्रदेश का कुल नुकसान 1,00,171.78 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
85 मकान पूरी तरह तबाह
प्राकृतिक आपदाओं का असर लोगों के घरों पर भी पड़ा है। प्रदेश में 85 मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं। इनमें 32 पक्के और 53 कच्चे मकान शामिल हैं। इसके अलावा 314 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, जिनमें 117 पक्के और 197 कच्चे घर हैं।
बारिश और आपदा की घटनाओं में 14 दुकानें और फैक्ट्रियां, 5 लेबर शेड, 5 घराट या श्मशान घाट और 284 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त या नष्ट हुई हैं। इस दौरान 429 पशुओं की मौत होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।
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310 बिजली ट्रांसफार्मर बंद, 84 पेयजल योजनाएं प्रभावित
मानसून के कारण बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। राज्य में 310 बिजली ट्रांसफार्मर बंद हैं। इनमें लाहौल-स्पीति में 101, सिरमौर में 78, मंडी में 64 और शिमला में 27 ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। सोलन में 15, ऊना में 14, हमीरपुर में 9 और कुल्लू में 2 ट्रांसफार्मर बंद बताए गए हैं।
इसके साथ ही 84 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। हमीरपुर में 32, सिरमौर में 23, शिमला में 17, चंबा में 10 और सोलन में 2 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। संबंधित विभाग प्रभावित सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास में जुटे हैं।
राहत और बहाली का काम जारी
Himachal Pradesh Monsoon के चलते सामने आए नुकसान के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग राहत एवं बहाली के काम में जुटे हैं। बंद सड़कों को खोलने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और पेयजल योजनाओं को दोबारा चालू करने के लिए अलग-अलग स्तर पर काम किया जा रहा है।
हालांकि, मौसम की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। लगातार बारिश के बीच भूस्खलन, सड़क हादसों और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन के सामने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को जल्द बहाल करने की बड़ी चुनौती है। मानसून खत्म होने तक नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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