Prahaar Movie Review: Rajkummar Rao Impresses, but the Story Falls Short (pic-x)
Prahaar Movie Review: राजकुमार राव एक बार फिर वकील के किरदार में नजर आए हैं। उनकी फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ 26/11 मुंबई आतंकी हमले और पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी तक पहुंचाने की कानूनी लड़ाई पर आधारित है। फिल्म में राजकुमार राव ने विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका निभाई है। उनकी एक्टिंग फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन कहानी को पेश करने के तरीके में कुछ कमियां भी नजर आती हैं।
साल 2012 में फिल्म ‘शाहिद’ में वकील शाहिद आजमी की भूमिका निभाकर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाले राजकुमार राव एक बार फिर कानून और न्याय से जुड़े किरदार में दिखाई दिए हैं। निर्देशक अविनाश अरुण की इस बायोपिक में 26/11 हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई दिखाई गई है। सवाल यह है कि जानी-पहचानी घटना पर बनी यह फिल्म दर्शकों को कितना (Prahaar Movie Review) प्रभावित करती है?
क्या है ‘प्रहार’ की कहानी?
फिल्म की शुरुआत उज्ज्वल निकम की बेटी की शादी के दृश्य से होती है। इसके बाद कहानी (Prahaar Movie Story) 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की ओर बढ़ती है। ताज होटल और सीएसटी स्टेशन पर हुए हमलों के बाद पकड़े गए एकमात्र जिंदा आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ कानूनी लड़ाई फिल्म (Prahaar Movie Review) का मुख्य हिस्सा है। इसमें 1993 के मुंबई बम धमाकों का भी जिक्र किया गया है।
26/11 Mumbai Attacks की कहानी
कहानी में निकम के सामने आने वाली कानूनी चुनौतियों के साथ उनकी निजी जिंदगी की परेशानियों को भी दिखाया गया है। पत्नी की बीमारी, बेटे के साथ मतभेद और बेटी की शादी जैसी जिम्मेदारियों के बीच वह कसाब को सजा दिलाने की कोशिश करते हैं। 26/11 Mumbai Attacks की यह कहानी (Prahaar Movie Review) काफी हद तक पहले से जानी हुई है, इसलिए फिल्म की असली चुनौती इसे नए और प्रभावशाली (Prahaar Movie Review) अंदाज में पेश करना थी।
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राजकुमार राव की एक्टिंग फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम के किरदार को अपने अंदाज में निभाया है। वह सिर्फ असली व्यक्ति के हाव-भाव की नकल करने की कोशिश नहीं करते, बल्कि किरदार के संघर्ष और भावनाओं को सामने लाते हैं। कोर्ट में उनकी दलीलें और भावनात्मक संवाद फिल्म को असरदार बनाते हैं। फिल्म में एक संवाद खास ध्यान खींचता है, जिसमें निकम कहते हैं कि किसी केस को जीतने की खुशी तब तक नहीं मिलती, जब तक आरोपी को अपनी गलती का एहसास न हो। हालांकि, शुरुआती करीब आधे घंटे में कहानी कुछ धीमी लगती है। कमजोर पटकथा के कारण कई जगह भावनात्मक असर उतना गहरा नहीं बन पाता, जितनी उम्मीद (Prahaar Movie Review) की जाती है।
सहायक कलाकारों का कैसा रहा प्रदर्शन?
अजमल कसाब की भूमिका में ललित प्रभाकर ने अच्छा काम किया है। उनके अभिनय के जरिए कहानी के कई पहलू सामने आते हैं। जयदीप अहलावत पाकिस्तानी अधिकारी चौधरी जुल्फिकार अली के किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं, जबकि सिकंदर खेर कसाब के वकील की भूमिका में दमदार नजर आते हैं। उज्ज्वल निकम के बेटे अनिकेत निकम के रूप में ऋतिक सहोर और जस्टिस एम.एल. ताहिलियानी के किरदार में आशीष विद्यार्थी भी अपनी छाप छोड़ते हैं। वहीं, ज्योति निकम की भूमिका निभाने वाली वामिका गब्बी का अभिनय कुछ जगह कम प्रभावी लगता है। कुल मिलाकर कलाकारों का प्रदर्शन फिल्म को संभालता है, लेकिन कहानी (Prahaar Movie Review) की कमजोरियां पूरी तरह दूर नहीं हो पातीं।
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फिल्म कहां कमजोर पड़ती है?
फिल्म (Prahaar Movie Review) की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसका दायरा मुख्य रूप से कसाब के मुकदमे तक सिमट जाता है। उज्ज्वल निकम के लंबे कानूनी करियर और दूसरे चर्चित मामलों को ज्यादा जगह नहीं मिलती। गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और 2013 के मुंबई सामूहिक बलात्कार मामले जैसे प्रसंगों को शामिल करके उनकी पेशेवर जिंदगी के दूसरे पहलुओं को भी दिखाया जा सकता था। फिल्म पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए युवाओं को बहकाने और 26/11 हमलों से जुड़े पहलुओं को भी सामने लाती है। हालांकि, पटकथा में भावनात्मक गहराई और कहानी के बेहतर संयोजन की कमी महसूस होती है।
राजकुमार राव – ललित प्रभाकर की भूमिका दमदार
प्रहार’ में राजकुमार राव का अभिनय और ललित प्रभाकर की भूमिका देखने लायक हैं, लेकिन कमजोर पटकथा फिल्म के असर को सीमित कर देती है। अगर आप 26/11 मुंबई हमले और उससे जुड़ी कानूनी लड़ाई में दिलचस्पी रखते हैं, तो फिल्म देख सकते हैं। उपलब्ध समीक्षा के अनुसार, इसे 2.5/5 रेटिंग दी गई है।

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