Kasari Masari to Krishnapuri: History and Atiq Ahmed Connection (pic-grok ai)
Kasari Masari History: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित कसारी-मसारी इलाका एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका नाम बदलकर ‘कृष्णपुरी’ करने की घोषणा की है। लंबे समय तक यह इलाका माफिया अतीक अहमद के परिवार और उसके पुराने इतिहास से जुड़कर चर्चा में रहा। अब नाम बदलने की घोषणा के बाद इसकी पुरानी पहचान और नए नाम को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
कसारी-मसारी (Kasari Masari History) की कहानी सिर्फ अतीक अहमद से जुड़े घटनाक्रम तक सीमित नहीं है। कभी बबूल के जंगलों वाला यह क्षेत्र समय के साथ रिहायशी बस्ती में बदल गया। यहां मौजूद कब्रिस्तान भी इसकी चर्चा की एक बड़ी वजह है, जहां अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को दफनाया गया था। आइए जानते हैं इस इलाके का इतिहास और अतीक अहमद से इसका संबंध।
कसारी-मसारी से क्या था अतीक अहमद का रिश्ता?
प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र में आने वाले कसारी-मसारी को अतीक अहमद (Atiq Ahmed Connection) के पारिवारिक इतिहास से जुड़ा इलाका (Kasari Masari History) माना जाता है। बताया जाता है कि अतीक का बचपन यहीं बीता था और उसने शुरुआती पढ़ाई भी इसी क्षेत्र में की थी। बाद में उसका परिवार प्रयागराज के चकिया इलाके में रहने लगा। आगे चलकर चकिया का नाम अतीक की राजनीतिक गतिविधियों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़े मामलों के कारण चर्चा में आया। इस तरह कसारी-मसारी उसके शुरुआती जीवन से जुड़ा रहा, जबकि चकिया को उसके प्रमुख ठिकानों में गिना जाता था।
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कभी बबूल के जंगलों से घिरा था यह इलाका
कसारी-मसारी के पुराने इतिहास (Kasari Masari History) के मुताबिक, 1960 और 1970 के दशक में यहां बड़े हिस्से में बबूल के जंगल हुआ करते थे। समय के साथ आबादी बढ़ी और जंगलों की जगह बस्तियां बसने लगीं। धीरे-धीरे यह इलाका प्रयागराज के रिहायशी क्षेत्रों में शामिल हो गया। हालांकि, अतीक अहमद और उसके परिवार से जुड़ाव के कारण भी कसारी-मसारी का नाम लंबे समय तक चर्चा में बना रहा। इलाके की पहचान समय के साथ बदलती गई, लेकिन इसका पुराना इतिहास लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफन हैं अतीक और अशरफ
कसारी-मसारी की चर्चा की एक अहम वजह यहां स्थित कब्रिस्तान है। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को अप्रैल 2023 में प्रयागराज में गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद इसी कब्रिस्तान में दफनाया गया था। दोनों की हत्या पुलिस सुरक्षा के बीच हुई थी। बताया जाता है कि अतीक के परिवार के अन्य सदस्यों और उसके माता-पिता की कब्रें भी इसी इलाके के कब्रिस्तान में हैं। इसी वजह से कसारी-मसारी का नाम अतीक अहमद के परिवार से जुड़े इतिहास (Kasari Masari History) के संदर्भ में भी सामने आता रहा है।
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जमीन और आवास योजना को लेकर भी रहा चर्चा में
अतीक अहमद (Atiq Ahmed Grave) और उसके गिरोह से जुड़ी बताई गई संपत्तियों तथा कथित अवैध कब्जों के खिलाफ सरकारी एजेंसियां कार्रवाई करती रही हैं। ऐसी जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने के प्रयासों के बीच कसारी-मसारी क्षेत्र में आवास निर्माण की योजना का भी जिक्र हुआ है। इस क्षेत्र में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए घर बनाने की योजना को बदलाव की एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासीय निर्माण का भी इस संदर्भ में (Kasari Masari History) उल्लेख किया गया है।
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अब कृष्णपुरी के नाम से होगी नई पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से कसारी-मसारी (Krishnapuri Prayagraj) का नाम बदलकर कृष्णपुरी करने की घोषणा के बाद इलाके को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब तक अतीक अहमद के पारिवारिक इतिहास और पुराने ठिकानों से जोड़कर देखे जाने वाले इस क्षेत्र को नए नाम से पहचान देने की घोषणा की गई है। कसारी-मसारी का इतिहास जंगलों से बस्ती बनने और अतीक अहमद से जुड़े घटनाक्रमों तक फैला है। अब ‘कृष्णपुरी’ नाम की घोषणा के बाद इस इलाके की नई पहचान (Kasari Masari History) चर्चा के केंद्र में है।






