Tata Sons New Ventures: N Chandrasekaran with Air India aircraft and Tata Electronics facility showing FY26 loss and revenue figures । PHOTO AI
मुंबई | 28 जुलाई 2026: वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट ने Tata Sons New Ventures की तस्वीर पेश की, जिसमें भविष्य की संभावनाओं के साथ वित्तीय दबाव दिखाई देता है। टाटा संस की 16 गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में से सात घाटे में रहीं और उनका संयुक्त नुकसान ₹27,854 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के ₹15,311 करोड़ से लगभग दोगुना है। सबसे बड़ा असर Air India Loss का रहा, जबकि Tata Electronics Revenue ने नए कारोबारों में बढ़त दिखाई।
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घाटे का केंद्र बनी एयर इंडिया
Tata Sons New Ventures में एयर इंडिया सबसे बड़ी चुनौती रही। वित्त वर्ष 2026 में इसका घाटा बढ़कर ₹22,238 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह ₹10,859 करोड़ था। राजस्व भी ₹78,636 करोड़ से घटकर ₹71,870 करोड़ रह गया। वार्षिक रिपोर्ट में हवाई क्षेत्र बंद होने, पश्चिम एशिया संघर्ष से ईंधन कीमतों पर दबाव, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और AI171 दुर्घटना को प्रमुख चुनौतियों में गिना गया है। चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने पुनर्निर्माण को पांच से दस वर्ष की यात्रा बताया। Air India Loss ने निजी पोर्टफोलियो को सर्वाधिक प्रभावित किया।
डिजिटल कारोबार पर भी दबाव
Tata Sons New Ventures के तहत टाटा डिजिटल ने ₹35,990 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, लेकिन उसका नुकसान बढ़कर ₹4,974 करोड़ पहुंच गया। कंपनी टाटा न्यू, बिगबास्केट, क्रोमा और टाटा 1एमजी जैसे कारोबारों को एक ढांचे में जोड़ रही है। तेज कॉमर्स की ओर बदलते बाजार ने बिगबास्केट के मॉडल पर पुनर्विचार का दबाव बनाया। समूह अब टाटा न्यू का ध्यान वित्तीय सेवाओं, लॉयल्टी, भुगतान, कर्ज और बीमा पर केंद्रित कर रहा है। Air India Loss से अलग यह चुनौती उपभोक्ता व्यवहार और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी है।
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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का दोहरा परिणाम
Tata Sons New Ventures में सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने किया। कंपनी का राजस्व लगभग दोगुना होकर ₹1,31,082 करोड़ पहुंचा और उसने एयर इंडिया को पीछे छोड़कर निजी कंपनियों में सर्वाधिक कमाई की। यही Tata Electronics Revenue समूह की इलेक्ट्रॉनिक्स रणनीति की गति दिखाता है। दूसरी ओर, कंपनी का घाटा ₹70 करोड़ से बढ़कर ₹1,611 करोड़ हो गया। स्मार्टफोन असेंबली, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग, बड़े संयंत्र और धोलेरा फैब जैसे पूंजी-प्रधान कार्यक्रमों के कारण शुरुआती लागत ऊंची बनी हुई है।
एग्राटास अभी निवेश के दौर में
Tata Sons New Ventures का बैटरी कारोबार एग्राटास निर्माण चरण में है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने ₹1,101 करोड़ का घाटा दर्ज किया, जो पिछले वर्ष ₹741 करोड़ था। भारत और ब्रिटेन में गीगाफैक्ट्री तैयार हो रही हैं तथा व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ है। इसलिए खर्च को तकनीक, संयंत्र और आपूर्ति शृंखला विकसित करने की लागत से जोड़ा जा रहा है। Tata Electronics Revenue बताता है कि विनिर्माण कारोबार को पैमाना मिलने पर आय तेजी से बढ़ सकती है।
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सात घाटे में, नौ मुनाफे में
Tata Sons New Ventures की चर्चा चार नामों तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एग्राटास, टाटा प्रोजेक्ट्स, टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर और टाटा प्ले घाटे में रहीं। दूसरी ओर, नौ निजी कंपनियों ने मुनाफा दर्ज किया और अन्य बारह गैर-सूचीबद्ध कारोबारों का संयुक्त लाभ ₹2,070 करोड़ रहा। इससे साफ है कि पूरा निजी पोर्टफोलियो संकट में नहीं है; दबाव मुख्यतः बड़े निवेश और लंबी तैयारी वाले क्षेत्रों में केंद्रित है। Air India Loss इस अंतर को सबसे स्पष्ट बनाता है।
समूह की कुल स्थिति मजबूत
Tata Sons New Ventures के घाटे के बावजूद टाटा संस का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा। कंपनी का राजस्व 9.1 प्रतिशत बढ़कर ₹42,367 करोड़ और कर पश्चात लाभ 21.8 प्रतिशत बढ़कर ₹31,961 करोड़ हुआ। टाटा समूह का संयुक्त राजस्व ₹16,24,030 करोड़ तथा कर पश्चात लाभ ₹1,70,525 करोड़ दर्ज किया गया। यह बताता है कि स्थापित व्यवसाय नए निवेशों के दबाव को संतुलित कर रहे हैं। Tata Electronics Revenue भविष्य के विनिर्माण अवसरों का संकेत है, जबकि विमानन और डिजिटल इकाइयों को लाभप्रदता तक पहुंचाने की चुनौती जारी है।
बोर्डरूम में रणनीतिक बहस
Tata Sons New Ventures में बढ़ते निवेश को लेकर मतभेदों की खबरें सामने आईं। फरवरी की बोर्ड बैठक में नोएल टाटा ने कुछ शर्तों के साथ एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर तत्काल निर्णय का विरोध किया, जिसके बाद फैसला टाल दिया गया। वार्षिक रिपोर्ट इन निवेशों को भारत की भविष्य की औद्योगिक जरूरतों से जोड़ती है। चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर, डिजिटल ढांचे, विमानन और ऊर्जा भंडारण को लंबी अवधि में परिणाम देने वाले क्षेत्र बताया। Air India Loss ने बहस को तीखा बनाया है, लेकिन अंतिम रणनीतिक निष्कर्ष सामने नहीं आया।
असली परीक्षा अब निष्पादन की
Tata Sons New Ventures की कहानी केवल घाटे की नहीं, बल्कि औद्योगिक दांव की भी है। आगामी वर्षों में कसौटी यह होगी कि निवेश समयबद्ध उत्पादन, बेहतर सेवा, बाजार हिस्सेदारी और टिकाऊ मुनाफे में बदलता है या नहीं। Tata Electronics Revenue सकारात्मक दिशा दिखाता है, जबकि एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और एग्राटास को खर्च पर नियंत्रण तथा स्पष्ट उपलब्धियां साबित करनी होंगी। नई कंपनियों की सफलता ही तय करेगी कि यह रणनीति भविष्य का इंजन बनेगी या दीर्घकालीन वित्तीय बोझ।
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