Delhi CAG Report on Delhi government investment, subsidy and capital expenditure.(PC- Team)
नई दिल्ली|10 अगस्त,2026: दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को वित्त वर्ष 2024-25 से जुड़ी Delhi CAG Report पेश की। रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के वित्तीय प्रबंधन, सब्सिडी, कैपिटल खर्च और सरकारी कंपनियों में किए गए निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। CAG के मुताबिक, दिल्ली सरकार के कुल खर्च में रेवेन्यू एक्सपेंडिचर की हिस्सेदारी काफी अधिक रही, जिससे कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए वित्तीय गुंजाइश सीमित हुई।
सब्सिडी बढ़ने से कैपिटल खर्च पर दबाव
Delhi CAG Report के अनुसार, 2015 से 2025 के बीच दिल्ली सरकार की सब्सिडी में 3,222 करोड़ रुपये यानी करीब 172.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस बढ़ोतरी में बिजली सब्सिडी की बड़ी भूमिका रही। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में बिजली सब्सिडी में करीब 2,033 करोड़ रुपये यानी 128.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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CAG ने बताया कि सब्सिडी और अन्य प्रतिबद्ध खर्चों के बढ़ने का असर सरकार के कैपिटल खर्च पर पड़ा। कुल सरकारी खर्च में रेवेन्यू एक्सपेंडिचर का हिस्सा 88.38 प्रतिशत तक रहा। इसके कारण लंबे समय के लिए परिसंपत्तियों और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च करने के लिए सीमित संसाधन बचे।
2021-22 से कैपिटल खर्च में बड़ी गिरावट
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर भी चिंता जताई गई है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 में कैपिटल खर्च 8,311 करोड़ रुपये था। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली और 2024-25 में यह घटकर करीब 3,695 करोड़ रुपये रह गया।
Delhi CAG Report में कहा गया है कि कुल सरकारी खर्च में कैपिटल खर्च की हिस्सेदारी भी सीमित रही। 2015-25 की अवधि में यह कुल खर्च के करीब 7 से 15 प्रतिशत के बीच रही। कैपिटल खर्च में कमी का सीधा संबंध लंबी अवधि की परिसंपत्तियों, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश की क्षमता से जोड़ा गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत
CAG की रिपोर्ट में दिल्ली सरकार को अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकास की गति बढ़ाने के लिए फिजिकल और ह्यूमन कैपिटल में लगातार निवेश जरूरी है।
इसके लिए टैक्स कलेक्शन को बेहतर करने, टैक्स अनुपालन बढ़ाने और नॉन-टैक्स रेवेन्यू के नए स्रोत विकसित करने जैसे कदम उठाने की जरूरत बताई गई है। CAG के अनुसार, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का पर्याप्त हिस्सा विकास और परिसंपत्ति निर्माण से जुड़े कामों पर खर्च हो।
सरकारी कंपनियों में निवेश पर 1% से भी कम रिटर्न
Delhi CAG Report का एक अहम हिस्सा दिल्ली सरकार के PSUs और सरकारी कंपनियों में किए गए निवेश से मिलने वाले रिटर्न से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार का इन संस्थानों में कुल निवेश बढ़कर 21,810 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 में यह निवेश 18,492 करोड़ रुपये था। 2024-25 तक इसमें बढ़ोतरी होकर यह 21,810 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, इस निवेश के मुकाबले सरकार को मिलने वाला डिविडेंड और अन्य वित्तीय रिटर्न बेहद कम रहा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन निवेशों पर सालाना रिटर्न 1 प्रतिशत से भी कम रहा। यानी सरकार ने जिन सरकारी कंपनियों और संस्थानों में बड़ी राशि लगाई, उनसे मिलने वाला वित्तीय लाभ निवेश की तुलना में काफी सीमित रहा।
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कर्ज की स्थिति को लेकर क्या कहा CAG ने?
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के कर्ज और वित्तीय स्थिरता से जुड़े पहलुओं का भी विश्लेषण किया गया है। CAG के आकलन के मुताबिक, दिल्ली का कर्ज ट्रेंड फिलहाल अत्यधिक वित्तीय जोखिम की स्थिति नहीं दिखाता। उधारी को लेकर कुछ वित्तीय अनुशासन और स्थिरता के संकेत भी रिपोर्ट में सामने आए हैं।
हालांकि, CAG ने इस बात पर जोर दिया कि कर्ज का इस्तेमाल ऐसे निवेशों के लिए किया जाना चाहिए, जो भविष्य में आर्थिक गतिविधियों और विकास को बढ़ावा दें। सरकार के लिए जरूरी है कि उधार लिए गए संसाधनों का इस्तेमाल केवल पुराने दायित्वों को पूरा करने के बजाय उत्पादक क्षेत्रों में किया जाए।
सात साल बाद विधानसभा में पेश हुई CAG रिपोर्ट
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के साथ विधानसभा में पेश की गई CAG रिपोर्ट की संख्या 19 हो गई है।
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विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, पिछले करीब सात वर्षों में CAG की रिपोर्ट सदन में पेश नहीं की गई थी। अब रिपोर्ट विधानसभा के सामने रखे जाने के बाद इस पर आगे विचार और चर्चा की जाएगी।
रिपोर्ट के बाद बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
Delhi CAG Report सामने आने के बाद सब्सिडी, सरकारी निवेश और कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट के आंकड़े सरकार के सामने दोहरी चुनौती भी रखते हैं, एक तरफ जनता से जुड़ी सब्सिडी और कल्याणकारी खर्च को बनाए रखना और दूसरी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर तथा विकास के लिए पर्याप्त पूंजीगत निवेश सुनिश्चित करना।
CAG की रिपोर्ट किसी सरकार की नीति पर राजनीतिक फैसला नहीं देती, बल्कि सरकारी वित्त और खर्च के आंकड़ों का ऑडिट आधारित आकलन प्रस्तुत करती है। इसलिए रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों को व्यापक वित्तीय संदर्भ में समझना जरूरी होगा।
फिलहाल Delhi CAG Report ने दिल्ली सरकार के खर्च, सब्सिडी, कैपिटल निवेश और सरकारी कंपनियों में लगाए गए हजारों करोड़ रुपये से मिलने वाले कम रिटर्न को लेकर महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़े किए हैं। आने वाले विधानसभा सत्र में इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
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