Uttarakhand SIR voter list verification and 156 objections under one name.(PC- Team)
देहरादून |10 अगस्त,2026: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Uttarakhand SIR को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया के बीच बड़ी संख्या में आपत्तियां सामने आई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उन मामलों की है, जहां एक ही नाम से दर्जनों और कुछ मामलों में 100 से अधिक आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता, सत्यापन और संभावित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
Uttarakhand SIR के बीच 12,209 आपत्तियां दर्ज
Uttarakhand SIR के तहत प्रदेश में बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 19 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बाद मतदाता सूची में दर्ज नामों को लेकर आपत्तियां दाखिल करने का सिलसिला शुरू हुआ।
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अब तक कुल 12,209 वास्तविक आपत्ति आवेदन दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके खिलाफ असामान्य रूप से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज हुई हैं। हालांकि, केवल एक नाम के बार-बार सामने आने से यह साबित नहीं होता कि सभी आवेदन फर्जी हैं। अलग-अलग लोगों का नाम एक जैसा होना संभव है। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में एक ही नाम से आपत्तियां जांच का विषय जरूर बनती हैं।
नितिन नाम से सबसे ज्यादा 156 आपत्तियां
आंकड़ों में नितिन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। इस नाम से कुल 156 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ये मामले मुख्य रूप से जसपुर और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा विनीत गिरि गोसाई के नाम से 126, कार्तिक घीक के नाम से 125, अशोक प्रसाद के नाम से 113 और अभिषेक तिवारी के नाम से 104 आपत्तियां दर्ज हैं। लतिका सिकदार के नाम से 93, विजय यादव के नाम से 90, जयमहाशक्ति मिश्रा के नाम से 76, गुरमेल सिंह के नाम से 75 और रामकुमार के नाम से 73 आपत्तियां सामने आई हैं। इन 10 नामों को मिलाकर 1,124 आपत्तियां दर्ज हुई हैं, जो कुल आपत्तियों का लगभग 9.2 प्रतिशत बैठती हैं।
जसपुर और किच्छा में सबसे ज्यादा शिकायतें
विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो जसपुर सबसे ऊपर है। यहां 3,896 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी है। इनमें नितिन नाम से 64 आपत्तियां बताई गई हैं।
इसके बाद किच्छा में 2,857 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। यहां नितिन नाम से 147 आपत्तियां सामने आई हैं। काशीपुर में 1,489, रुद्रपुर में 1,129 और रुड़की में 676 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी है।
इसके अलावा बाजपुर में 438, सितारगंज में 274, गदरपुर में 227, मंगलौर में 226 और हरिद्वार ग्रामीण में 127 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि आपत्तियों का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रित है।
उधम सिंह नगर में सबसे ज्यादा आपत्तियां
जसपुर, किच्छा, काशीपुर, रुद्रपुर, बाजपुर, सितारगंज और गदरपुर को मिलाकर उधम सिंह नगर की सात विधानसभा सीटों में 10,310 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
वहीं हरिद्वार जिले के रुड़की, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण में कुल 1,029 आपत्तियां दर्ज हैं। इस तरह इन 10 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 11,339 आपत्तियां सामने आती हैं। यह कुल 12,209 आपत्तियों का लगभग 93 प्रतिशत है। बाकी विधानसभा क्षेत्रों में करीब 870 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी है।
किन वजहों से दर्ज हो रही हैं आपत्तियां?
Uttarakhand SIR के आंकड़ों में आपत्तियों के अलग-अलग कारण भी सामने आए हैं। सबसे अधिक 8,166 आपत्तियां ऐसे मतदाताओं को लेकर बताई गई हैं, जिन्हें अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित यानी Absent/Permanently Shifted बताया गया है।
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इसके बाद 2,872 आपत्तियां पहले से नाम दर्ज होने यानी Already Enrolled के आधार पर हैं। वहीं 730 मामले Permanently Shifted, 286 मृतक मतदाताओं, 110 कम उम्र के मतदाताओं और दो मामलों में भारतीय नागरिक नहीं होने के आधार पर दर्ज किए गए हैं। 42 मामलों में आपत्ति का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है।
879 मामलों में आपत्ति करने वाला और संबंधित नाम एक
Uttarakhand SIR से जुड़ा एक और आंकड़ा राजनीतिक चर्चा का कारण बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 879 ऐसे आवेदन हैं, जिनमें आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम और जिस मतदाता के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई है, उसका नाम एक ही बताया गया है।
ये आवेदन कुल 12,209 आपत्तियों का करीब 7.2 प्रतिशत हैं। इस तरह के मामलों में भी अंतिम निष्कर्ष सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग और सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि आपत्तियों की आड़ में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो सकती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमेंद्र बिष्ट ने प्रक्रिया को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पार्टी को आशंका है कि इसका असर वास्तविक मतदाताओं पर पड़ सकता है।
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हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों को अभी राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जा रहा है। किसी मतदाता का नाम केवल आपत्ति दर्ज होने से मतदाता सूची से बाहर नहीं होता।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीति
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष चुनाव से पहले ही अपनी हार का माहौल तैयार कर रहा है। भाजपा नेता जोत सिंह बिष्ट का कहना है कि कांग्रेस SIR प्रक्रिया को लेकर गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस खुद फर्जी आपत्तियां दर्ज कराकर उसका राजनीतिक आरोप भाजपा पर लगा रही है। दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब निगाहें निर्वाचन आयोग की सत्यापन प्रक्रिया पर टिकी हैं।
सत्यापन के बाद साफ होगी असली तस्वीर
यह समझना जरूरी है कि Uttarakhand SIR में किसी नाम के खिलाफ आपत्ति दर्ज होना अंतिम फैसला नहीं है। संबंधित दावे, दस्तावेज और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद ही तय होगा कि मतदाता का नाम सूची में रहेगा या उसमें कोई बदलाव किया जाएगा।
फिलहाल एक ही नाम से दर्जनों और कई मामलों में 100 से ज्यादा आपत्तियों का सामने आना निश्चित रूप से चर्चा का विषय है। लेकिन इन आंकड़ों से किसी तरह की गड़बड़ी का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। Uttarakhand SIR की सत्यापन प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन आपत्तियों में कितने वास्तविक मामले हैं और कितने मामलों में किसी तरह की अनियमितता पाई जाती है।
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