Delhi Red Fort Blast: Imam Irfan and Delhi’s Red Fort in a graphic explaining the NIA investigation into the November 2025 blast.
अपडेट 22 अक्टूबर 2026
Delhi Red Fort Blast: लाल किला ब्लास्ट केस में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े आरोप सामने आए। 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में धमाका हुआ था। इस मामले में इमाम इरफान का नाम भी सामने आया। NIA जांच अब आरोपपत्र दाखिल होने तक पहुंच चुकी है। हालांकि, किसी पर आरोप लगना और अदालत में उसका दोष साबित होना अलग बातें हैं।
कौन है इमाम इरफान?
Delhi Red Fort Blast केस में आरोपी इमाम इरफान का पूरा नाम मुफ्ती इरफान अहमद वागे बताया गया है। वह जम्मू-कश्मीर के शोपियां का रहने वाला है। नवंबर 2025 में एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि वह श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल कर्मचारी रह चुका है। रिपोर्ट में उस पर कुछ डॉक्टरों को कट्टरपंथ की ओर ले जाने का आरोप लगाया गया था। NIA जांच से जुड़ी खबरों में इन बातों को आरोप के रूप में ही समझना जरूरी है।
कब हुई गिरफ्तारी?
Delhi Red Fort Blast केस में 20 नवंबर 2025 को एजेंसी ने चार और लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। इनमें इमाम इरफान, डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, डॉ. आदिल अहमद राठेर और डॉ. शाहीन सईद शामिल थे। एजेंसी ने इन लोगों पर हमले में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया था। उस समय कुछ आरोपियों के परिवारों ने आरोपों से इनकार किया था। NIA जांच में हुई इन गिरफ्तारियों से मामले की कई नई कड़ियां सामने आईं।
आरोपपत्र में क्या अपडेट है?
Delhi Red Fort Blast केस में 14 मई 2026 को दस आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसमें इमाम इरफान का नाम भी शामिल था। आरोपपत्र में एजेंसी बताती है कि किस आरोपी पर क्या आरोप है और उसके पास कौन से सबूत हैं। NIA जांच में जुटाए गए इन सबूतों और आरोपों की परख अदालत में होनी है।
Delhi Red Fort Blast केस में 27 जून 2026 को तीन और आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसके बाद आरोपपत्र में शामिल लोगों की कुल संख्या 13 हो गई। अगस्त 2026 की पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने आरोपपत्र का संज्ञान भी लिया। इमाम इरफान से जुड़े मामले में यह एक अहम कदम है। हालांकि, NIA जांच पर अदालत का संज्ञान लेने का मतलब किसी आरोपी को दोषी ठहराना नहीं है।
क्या इरफान ही मुख्य साजिशकर्ता था?
Delhi Red Fort Blast केस की शुरुआती खबरों में इमाम इरफान को कथित मास्टरमाइंड बताया गया था। लेकिन सितंबर 2026 में आरोपपत्र पर आधारित एनडीटीवी की रिपोर्ट में उमर उन नबी को कथित मुख्य साजिशकर्ता और मॉड्यूल का संचालन करने वाला बताया गया। इसलिए NIA जांच की पूरी जानकारी देखे बिना इरफान को अकेले पूरी साजिश का सरगना बताना सही नहीं होगा। अलग-अलग आरोपियों पर अलग भूमिकाएं निभाने के आरोप हैं।
डॉक्टरों और फरीदाबाद से क्या संबंध था?
Delhi Red Fort Blast केस में कुछ आरोपियों के डॉक्टर होने और फरीदाबाद में काम करने की बात सामने आई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उमर नबी और मुजम्मिल गनई अल-फलाह के चिकित्सा संस्थान में सहकर्मी थे। जांचकर्ताओं के हवाले से इमाम इरफान और गनई के बीच संपर्क की बात भी कही गई थी। NIA जांच का यह हिस्सा कुछ खास लोगों के कथित संबंधों से जुड़ा है। इससे सभी डॉक्टरों या पूरे संस्थान की भूमिका साबित नहीं होती।
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आतंकी संगठनों से संबंधों पर क्या आरोप हैं?
Delhi Red Fort Blast केस की शुरुआती पड़ताल में श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पोस्टर मिलने की बात सामने आई थी। जांचकर्ताओं ने इमाम इरफान को इस पोस्टर मामले और फरीदाबाद में मिले कथित नेटवर्क के बीच एक अहम कड़ी बताया था। बाद में NIA जांच के आरोपपत्र से जुड़ी खबरों में अंसार गजवत-उल-हिंद और अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप शाखा से कथित संबंधों का भी उल्लेख हुआ। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनकी अदालत में परख होनी है।
धमाके में कितने लोगों की मौत हुई?
Delhi Red Fort Blast केस की शुरुआती खबरों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी। मई 2026 की आधिकारिक जानकारी में 11 लोगों की मौत का उल्लेख है। सितंबर 2026 की आरोपपत्र आधारित रिपोर्ट में 29 लोगों के घायल होने की बात कही गई। इमाम इरफान की कथित भूमिका के साथ पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना भी इस मामले का अहम हिस्सा है। NIA जांच से जुड़े आंकड़े लिखते समय उनके स्रोत और तारीख का ध्यान रखना जरूरी है।
अब आगे क्या?
Delhi Red Fort Blast केस में आगे अदालत के सामने रखे गए सबूत और दोनों पक्षों की दलीलें अहम होंगी। इमाम इरफान सहित हर आरोपी की भूमिका का फैसला उसके खिलाफ मौजूद सबूतों के आधार पर होगा। NIA जांच में लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम फैसला अदालत करेगी। इस मामले को समझते समय किसी व्यक्ति पर लगे आरोपों के आधार पर पूरे धर्म, पेशे या समुदाय को जिम्मेदार मानना सही नहीं है।
-समाप्त-
