S Jaishankar UN Speech on Pahalgam Terror Attack and UN Reforms । IMAGE PIB
S Jaishankar UN Speech: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ पर आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर कड़ा संदेश दिया था। 24 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पहलगाम आतंकी हमला और संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब आतंकवाद को संरक्षण मिलता है, तो दुनिया में शांति और न्याय की उम्मीद कमजोर होती है।
पहलगाम हमले पर कड़ा सवाल
S Jaishankar UN Speech में विदेश मंत्री ने कहा कि सुरक्षा परिषद का एक सदस्य उस संगठन को बचा रहा है, जिसने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर दुनिया कैसे भरोसा करेगी? उनका संदेश था कि आतंकियों और उनके पीड़ितों को एक नजर से देखना गलत है।
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पाकिस्तान और चीन पर निशाना
S Jaishankar UN Speech को पाकिस्तान और चीन के लिए कड़ा कूटनीतिक संदेश माना गया। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान से TRF का नाम हटवाने की बात कही थी। दूसरी ओर, चीन पहले भी कुछ आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने के भारतीय प्रयासों में बाधा डाल चुका है। इससे पाकिस्तान का आतंकवाद और चीन की भूमिका फिर चर्चा में आए।
संयुक्त राष्ट्र में सुधार जरूरी
S Jaishankar UN Speech में विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था दुनिया की बदलती जरूरतों को पूरी तरह नहीं समझ पा रही है। कई जरूरी फैसले आपसी मतभेदों के कारण अटक जाते हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र सुधार और सुरक्षा परिषद में बदलाव बेहद जरूरी हैं, ताकि सभी देशों की आवाज को उचित महत्व मिल सके।
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आतंकवाद पर दोहरा रवैया क्यों?
S Jaishankar UN Speech का एक महत्वपूर्ण विषय आतंकवाद के प्रति कुछ देशों का दोहरा रवैया था। जयशंकर ने सवाल किया कि जब आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को प्रतिबंधों से बचाया जाता है, तो आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता का क्या अर्थ रह जाता है? उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद पर कार्रवाई और दुनिया में शांति के लिए सभी देशों को ईमानदार प्रयास करने होंगे।
विकासशील देशों की बढ़ती चिंता
S Jaishankar UN Speech में ग्लोबल साउथ की समस्याओं का भी जिक्र हुआ। विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध, व्यापार संबंधी पाबंदियां और सप्लाई चेन पर निर्भरता विकासशील देशों के लिए बड़ी चुनौती हैं। संयुक्त राष्ट्र के 2030 विकास लक्ष्यों की धीमी प्रगति भी चिंता का विषय है। विकासशील देशों की समस्याएं और वैश्विक आर्थिक संकट अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताते हैं।
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भारत का शांति अभियानों में योगदान
S Jaishankar UN Speech में भारत की शांति स्थापना में भूमिका को भी प्रमुखता दी गई। जयशंकर ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अपने सैनिकों और संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारतीय जवानों के बलिदान ने विश्व शांति स्थापना और भारत की विदेश नीति को नई पहचान दी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भारत की जिम्मेदारी बताया।
UN@80 स्मारक डाक टिकट जारी
S Jaishankar UN Speech के अवसर पर विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ का विशेष स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। इसका डिजाइन MyGov पोर्टल पर आयोजित प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया था। टिकट का संदेश संघर्ष के समय शांति की आवश्यकता को दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र की वर्षगांठ और भारत का शांति संदेश इस आयोजन के मुख्य आकर्षण रहे।
भारत का दुनिया को संदेश
S Jaishankar UN Speech का सबसे बड़ा संदेश था कि संयुक्त राष्ट्र को कमजोर नहीं, बल्कि अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। जयशंकर ने कहा कि तमाम कमियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय सहयोग से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। भारत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार हो और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता बढ़े। यह संदेश आने वाले वर्षों में भी वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
-समाप्त-
