Sambhal Mosque Demolition in Raya Buzurg Uttar Pradesh। PIC TEAM
Sambhal Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अक्टूबर 2025 के दौरान हुई बुलडोजर कार्रवाई ने प्रशासन और मस्जिद समिति के बीच जमीन के विवाद को चर्चा में ला दिया। असमोली थाना क्षेत्र के राया बुजुर्ग गांव में स्थित गाउसुल वारा मस्जिद और उससे जुड़े बारात घर को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए हटाने की कार्रवाई की गई। संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण के इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट तक कानूनी लड़ाई पहुंची। आइए जानते हैं कि बुलडोजर कार्रवाई क्यों हुई और अदालत ने क्या फैसला दिया।
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2 अक्टूबर को क्या हुआ?
Sambhal Mosque Demolition मामले में 2 अक्टूबर 2025 को प्रशासन बुलडोजर लेकर गांव पहुंचा। यहां तालाब की जमीन पर बने बताए जा रहे बारात घर को गिराया गया। हालांकि मस्जिद को तत्काल पूरी तरह नहीं हटाया गया। समिति ने निर्माण स्वयं हटाने के लिए समय मांगा था। संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर शुरू हुई इस बुलडोजर कार्रवाई के दौरान इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
प्रशासन ने क्या बताया?
Sambhal Mosque Demolition पर जिला प्रशासन का कहना था कि संबंधित जमीन राजस्व अभिलेखों में सरकारी उपयोग के लिए दर्ज थी। अधिकारियों के अनुसार, बारात घर तालाब की जमीन पर बना था और मस्जिद से जुड़ा निर्माण भी सरकारी भूमि के विवाद में शामिल था। प्रशासन ने कहा कि संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण से पहले नोटिस दिए गए थे। अधिकारियों ने बुलडोजर कार्रवाई को अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया बताया।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
Sambhal Mosque Demolition के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की बड़ी चुनौती थी। मौके पर पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए। ड्रोन से भी निगरानी की गई, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण जैसी संवेदनशील कार्रवाई में प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। बुलडोजर कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।
हाई कोर्ट में क्या हुआ?
Sambhal Mosque Demolition के खिलाफ मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। समिति का आरोप था कि उसे 2 सितंबर 2025 का ध्वस्तीकरण आदेश समय से उपलब्ध नहीं कराया गया। समिति ने कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने की। समिति ने बुलडोजर कार्रवाई रोकने के लिए अंतरिम राहत मांगी।
अदालत का अहम फैसला
Sambhal Mosque Demolition मामले में 4 अक्टूबर 2025 को हाई कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए उसका निस्तारण किया। अदालत ने तत्काल रोक लगाने से इनकार किया। साथ ही समिति को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67(5) के तहत सक्षम अपीलीय अदालत में जाने का विकल्प बताया। इस तरह संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर कानूनी रास्ता खुला रहा, लेकिन बुलडोजर कार्रवाई पर हाई कोर्ट से तत्काल रोक नहीं मिली।
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5 अक्टूबर को हटाई गई मस्जिद
Sambhal Mosque Demolition मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई के अगले दिन, 5 अक्टूबर को मस्जिद का निर्माण हटाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय लोगों और मस्जिद समिति के सदस्यों ने स्वयं बुलडोजर और अन्य उपकरणों की मदद से ढांचा गिराया। मौके पर पुलिस मौजूद रही। संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण की यह प्रक्रिया प्रशासनिक निगरानी में पूरी हुई। इस चरण की बुलडोजर कार्रवाई में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सामने आई।
संभल पहले भी रहा चर्चा में
Sambhal Mosque Demolition का मामला ऐसे जिले से जुड़ा था, जहां नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा हुई थी। इसी कारण प्रशासन के लिए शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण था। अक्टूबर 2025 की बुलडोजर कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी जमीन और धार्मिक निर्माण का सवाल उठाया। संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर प्रशासन और समिति के दावों में मतभेद बना रहा।
आगे क्या है कानूनी रास्ता?
Sambhal Mosque Demolition का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जमीन का स्वामित्व और कानूनी प्रक्रिया है। प्रशासन का दावा था कि निर्माण सरकारी भूमि पर था, जबकि समिति ने नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण का यह मामला बताता है कि किसी भी बुलडोजर कार्रवाई में जमीन के रिकॉर्ड, वैध नोटिस और अपील के अधिकार का महत्व होता है। High Court ने जमीन के विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं दिया था, बल्कि वैधानिक अपील का रास्ता खुला रखा था।
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