IIT Kharagpur Director Suman Chakraborty shares message for students about exam pressure
IIT Kharagpur Director: परीक्षा, नंबर और रिजल्ट को लेकर छात्रों पर बढ़ते दबाव के बीच IIT Kharagpur Director प्रो. सुमन चक्रवर्ती का छात्रों के नाम संदेश चर्चा में है। उन्होंने छात्रों को परीक्षा और ग्रेड को लेकर अपनी सोच संतुलित रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि परीक्षा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन किसी छात्र की पूरी पहचान केवल उसके नंबरों या एक परीक्षा के प्रदर्शन से तय नहीं होती।
IIT Kharagpur Director का यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में छात्रों पर पढ़ाई और परीक्षा के दबाव को लेकर चर्चा तेज है। साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे कैंपस में छात्रों ने प्रदर्शन भी किया और मामले की पारदर्शी जांच की मांग उठी।
परीक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन छात्र की पहचान नहीं
प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया पोस्ट में छात्रों को परीक्षा के परिणामों को लेकर सकारात्मक और व्यापक नजरिया रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ग्रेड महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन वे किसी छात्र की पहचान नहीं होते।
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उनके संदेश का मूल भाव यह है कि किसी एक परीक्षा में खराब प्रदर्शन को जीवन की असफलता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पढ़ाई के दौरान कभी ऐसा भी हो सकता है कि पूरी तैयारी के बावजूद पेपर उम्मीद के मुताबिक न जाए। ऐसी स्थिति में निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ज्यादा जरूरी है।
IIT Kharagpur Director के संदेश में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की गई कि परीक्षा में लिखे गए जवाब किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता, प्रतिभा और भविष्य का मूल्यांकन नहीं कर सकते।
खराब पेपर का मतलब खराब भविष्य नहीं
छात्रों के लिए जारी संदेश में प्रो. चक्रवर्ती ने इस बात पर जोर दिया कि एक परीक्षा या एक ग्रेड को अपने भविष्य का अंतिम फैसला नहीं मानना चाहिए। किसी छात्र का पेपर खराब हो सकता है, नंबर उम्मीद से कम आ सकते हैं या किसी विषय में प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। लेकिन इन घटनाओं को जिंदगी की अंतिम स्थिति समझना सही नहीं है।
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उन्होंने छात्रों को कठिन समय में अकेला महसूस नहीं करने का भी संदेश दिया। उनका कहना है कि यदि कोई छात्र किसी मुश्किल दौर से गुजर रहा है, तो उसे मदद लेने और अपने आसपास के लोगों से बात करने में संकोच नहीं करना चाहिए। यह संदेश खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लगातार पढ़ाई, प्रतियोगिता और बेहतर प्रदर्शन के दबाव में रहते हैं।
IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद चर्चा
IIT Kharagpur Director का संदेश IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद सामने आया है। साहिल IIT बॉम्बे के Energy Science and Engineering विभाग में दूसरे वर्ष के छात्र थे। 18 सितंबर 2026 को उनकी हॉस्टल के कमरे में मौत हुई। इससे पहले परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन मिलने की बात सामने आई थी। IIT बॉम्बे के अनुसार, उन्होंने परीक्षा के सवालों को ChatGPT पर अपलोड कर जवाब लेने की कोशिश की थी। संस्थान ने कहा था कि घटना के बाद उनसे शिक्षक और विभाग प्रमुख ने बातचीत की और उन्हें काउंसल किया गया था। संस्थान के मुताबिक उस समय कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
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इस घटना के बाद IIT बॉम्बे परिसर में छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों की ओर से घटना की पारदर्शी जांच और संस्थान की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। वहीं साहिल के परिवार ने भी कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। IIT बॉम्बे ने परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि ऐसी कोई शिकायत संस्थान के SC/ST सेल या प्रशासन के सामने नहीं दी गई थी।
छात्रों के बीच मानसिक दबाव पर फिर बहस
साहिल वाकोडे की मौत के बाद देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक दबाव, परीक्षा व्यवस्था और संस्थानों की जिम्मेदारी को लेकर बहस एक बार फिर सामने आई है। खासकर IIT जैसे संस्थानों में दाखिला लेने वाले छात्रों से पढ़ाई और प्रदर्शन को लेकर काफी उम्मीदें रहती हैं।
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ऐसे माहौल में IIT Kharagpur Director का संदेश छात्रों को यह याद दिलाता है कि अकादमिक प्रदर्शन जीवन का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, लेकिन किसी छात्र का मूल्य केवल उसके मार्क्स या ग्रेड से तय नहीं किया जा सकता।
छात्रों के लिए क्या है इस संदेश का मतलब?
प्रो. सुमन चक्रवर्ती के संदेश को व्यापक रूप से देखें तो इसमें छात्रों को असफलता से डरने के बजाय उससे निपटने की बात कही गई है। खराब रिजल्ट आने पर आत्मविश्वास खोने के बजाय अपनी गलतियों को समझना, शिक्षकों से बात करना और आगे की तैयारी पर ध्यान देना जरूरी है।
IIT Kharagpur Director का यह संदेश उस सोच को चुनौती देता है जिसमें परीक्षा के नंबरों को ही सफलता का अंतिम पैमाना मान लिया जाता है। छात्रों के लिए जरूरी है कि वे किसी एक परीक्षा या ग्रेड को अपनी पूरी पहचान न बनने दें। साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए घटना के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। हालांकि, इस बीच छात्रों के बीच परीक्षा के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवाद की जरूरत जरूर सामने आई है।
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